खम्मा घणी सा!
यह ठिकाना कसुम्बी (जाखलाण) का पवित्र डिजिटल प्रांगण है। यह मात्र एक वेबसाइट नहीं, बल्कि सूर्यवंशी राठौड़ों के अदम्य साहस और स्वाभिमान का एक 'आभासी दरबार' है। यहाँ का हर पत्थर गवाह है उन अनगिनत युद्धों और अमर बलिदानों का, जिन्होंने हमारे कुल को इतिहास में अमर कर दिया।
इस प्रयास का मूल उद्देश्य हमारी विस्तृत वंशावली (Genealogy) और 'बीते कल' की मशाल को 'आने वाले कल' तक सुरक्षित पहुँचाना है, ताकि नई पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
"विरासत संजोना ही हमारा धर्म है।"
खम्मा घणी सा!
ठिकाना कसुम्बी के इस डिजिटल आंगन में आपका हार्दिक स्वागत है।
कृपया नीचे दिए गए फॉर्म में अपने विचार लिखकर हमारी आगन्तुक पंजिका (Guestbook) की शोभा बढ़ाएं।
"आपके शब्द, हमारी धरोहर।"